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Showing posts from 2018

हिंदी जन की बोली है

एक डोर में सबको जो है बाँधती वह हिंदी है, हर भाषा को सगी बहन जो मानती वह हिंदी है। भरी-पूरी हों सभी बोलियां यही कामना हिंदी है, गहरी हो पहचान आपसी यही साधना हिंदी है, सौत विदेशी रहे न रानी यही भावना हिंदी है। तत्सम, तद्भव, देश विदेशी सब रंगों को अपनाती, जैसे आप बोलना चाहें वही मधुर, वह मन भाती, नए अर्थ के रूप धारती हर प्रदेश की माटी पर, 'खाली-पीली-बोम-मारती' बंबई की चौपाटी पर, चौरंगी से चली नवेली प्रीति-पियासी हिंदी है, बहुत-बहुत तुम हमको लगती 'भालो-बाशी', हिंदी है। उच्च वर्ग की प्रिय अंग्रेज़ी हिंदी जन की बोली है, वर्ग-भेद को ख़त्म करेगी हिंदी वह हमजोली है, सागर में मिलती धाराएँ हिंदी सबकी संगम है, शब्द, नाद, लिपि से भी आगे एक भरोसा अनुपम है, गंगा कावेरी की धारा साथ मिलाती हिंदी है, पूरब-पश्चिम/ कमल-पंखुरी सेतु बनाती हिंदी है। -गिरिजा कुमार माथुर

काका हाथरसी ki poem in hindi

सुनो एक कविगोष्ठी का , अद्भुत सम्वाद । कलाकार द्वय भिडे गए , चलने लगा विवाद ।।   चलने लगी विवाद , एक थे कविवर ' घायल ' ।   दूजे श्री ' तलवार ', नई कविता के कायल ।। कह ' काका ' कवि , पर्त काव्य के खोल रहे थे।   कविता और अकविता को , वे तोल रहे थे ।। शुरू हुई जब वार्ता , बोले हिन्दी शुद्ध ।   साहित्यिक विद्वान् थे , परम प्रचण्ड प्रबुद्ध ।।   परम प्रचण्ड प्रबुद्ध , तर्क में आई तेजी ।   दोनो की जिह्वा पर , चढ़ बैठी अगरेज़ी ॥   कह ' काका ' घनघोर , चली इंगलिश में गाली ।   संयोजक जी ने गोष्ठी , ' डिसमिस ' कर डाली ।।    काका हाथरसी

जलियाँवाला बाग में बसंत / सुभद्राकुमारी चौहान

यहाँ कोकिला नहीं , काग हैं , शोर मचाते ,  काले काले कीट , भ्रमर का भ्रम उपजाते।   कलियाँ भी अधखिली , मिली हैं कंटक - कुल से ,  वे पौधे , व पुष्प शुष्क हैं अथवा झुलसे।   परिमल - हीन पराग दाग सा बना पड़ा है ,  हा ! यह प्यारा बाग खून से सना पड़ा है।   ओ , प्रिय ऋतुराज ! किन्तु धीरे से आना ,  यह है शोक - स्थान यहाँ मत शोर मचाना।   वायु चले , पर मंद चाल से उसे चलाना ,  दुःख की आहें संग उड़ा कर मत ले जाना।   कोकिल गावें , किन्तु राग रोने का गावें ,  भ्रमर करें गुंजार कष्ट की कथा सुनावें।       लाना संग में पुष्प , न हों वे अधिक सजीले ,  तो सुगंध भी मंद , ओस से कुछ कुछ गीले।   किन्तु न तुम उपहार भाव आ कर दिखलाना ,  स्मृति में पूजा हेतु यहाँ थोड़े बिखराना।   कोमल बालक मरे यहाँ गोली खा कर ,  कलियाँ उनके लिये गिराना थोड़ी ला कर।   आशाओं से भरे हृदय भी छिन्...